भारत द्वारा पाकिस्तान पर बमबारी, इस्लामाबाद द्वारा सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

वसंथा रूपासिंघे
२७ फ़रवरी २०१९

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद पहली बार भारत द्वारा मंगलवार सुबह पाकिस्तान सीमा के अंदर एक हवाई हमले को अंजाम दिया गया। इस हमले ने दक्षिण एशिया के चिर-प्रतिद्वंद्वी व परमाणु-शक्ति सम्पन्न देशों के बीच तनाव को उबाल दिया है।

जहां एक ओर इस्लामाबाद ने जवाबी कार्रवाई के हक की बात करते हुए भारत को “चौंका देने की” चेतावनी दी है वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने भी भारत को “जैसे को तैसा” स्थिति अपनाने के लिए क्षेत्र को एक अनियंत्रित युद्ध स्थिति में धकेलने के लिए चेताया है।

जिस समय ये लेख प्रकाशन में था, उसी दौरान भारत व पाक अधिकृत कश्मीर को विभाजित करने वाली नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार भारी गोलाबारी की खबरें प्राप्त हुई हैं।

भारत सरकार ने दावा किया कि 12 भारतीय वायु सेना मिराज फाइटर जेट्स ने 1000 किलो “प्रीसीज़न” बम्ब का इस्तेमाल कर भारत के कट्टर दुश्मन व आतंकवादी संगठन जैश-ए मोहम्मद (JeM) के प्रमुख ठिकाने को नष्ट कर दिया है। ये प्रमुख ठिकाना पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट में एलओसी से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित था।

भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले मंगलवार के संवाददाता सम्मेलन में बताया, "इस ऑपरेशन में बड़ी तादाद में फिदायीन हमलों का प्रशिक्षण ले रहे जैश आतंकियों, प्रशिक्षकों, वरिष्ठ कमांडरों और जिहादियों को मार दिया गया।"

भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर मरने वालों की पुष्टि नहीं की है। लेकिन भाजपा सरकार के आंतरिक सूत्रों के हवाले से भारतीय मीडिया ने मरने वालों की संख्या 200 से 300 के बीच बताई है।

हालांकि पाकिस्तान पर भारत द्वारा ये हमला पहले से तय नहीं था., पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अन्य वरिष्ठ सरकारी तथा सैन्य अधिकारी 14 फरवरी को पुलवामा के पास आत्मघाती हमले में मार दिये जाने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 सैनिकों की मौत का बदला पाकिस्तान से लिए जाने की बात लगातार कह रहे थे।

जैशे मोहम्मद द्वारा इस हमले की ज़िम्मेदारी लिए जाने के ठीक बाद ही मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान को इसके लिए जिम्मेदार बताया गया व सेना को खुली छूट भी दे दी गई।

बीजेपी सरकार ने पाकिस्तान पर हमले के बाद कल प्रतिशोधी तरीकों के बारे में घोषणा की। जिसमें सबसे पसंदीदा देश के दर्जे को रद्द करना तथा सिंधु घाटी जल संधि में भारतीय "वर्चस्व" को बढ़ाना शामिल है। इस वर्चस्व के बढ़ाए जाने से सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए पाकिस्तान की रोजाना की ज़रूरत प्रभावित होती है तथा उनकी अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है।

भारत सरकार ने पुलवामा हमले का हवाला देकर कल पाकिस्तान पर सुनियोजित हमले को सही नहीं ठहराया जो भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधे तौर पर उल्लंघन था। बल्कि गोखले ने इसे एक "गैर-सैन्य-कार्रवाई" बताकर इसे जैश-ए-मोहम्मद पर एक विशेष कार्रवाई बताया जो पुलवामा जैसा ही एक और आतंकी हमला करने की फिराक में था।

इस्लामाबाद ने रात के अँधेरे में किये गए मंगलवार की सुबह भारत द्वारा गए इस हमले के संस्करण को विवादित किया है । पाकिस्तान सरकार ने प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक से जारी एक बयान में भारत सरकार के तमाम दावों को "आत्म-मुग्ध, लापरवाह और खोखला" बताया है। पाकिस्तान के अनुसार, पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने भारतीय लड़ाकू विमानों का पीछा किया और उनके बम्ब जंगल क्षेत्र में गिरे जिसमें केवल एक नागरिक घायल हुआ।

नई दिल्ली और इस्लामाबाद द्वारा किए जा रहे सभी दावों का भारी अंतर आज आपसी संघर्ष के कगार को दर्शाते हैं। दोनों देशों की सरकारों ने दशकों से अपनी आपसी प्रतिद्वंद्विता का इस्तेमाल सामाजिक तनाव को बढ़ाने के लिए जमकर किया है और अपने अभेद्य शत्रु के लिए हमेशा से अपने सभी नियमों, क़ानूनों को ताक पर रखा है।

पाकिस्तान ने मंगलवार के हमले को पूरी तरह खारिज किया है पर वहाँ की सेना और सरकार ने इसका हर तरह से जवाब देने के संकेत दिये हैं।

पाकिस्तानी सेना प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ के अनुसार, “भारत के खिलाफ़ राजनयिक, राजनीतिक व सैन्य मोर्चों पर कार्रवाई की जाएगी।”

इसके बाद उन्होंने कहा कि फैसला हो चुका है, भारत इंतज़ार करे। कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रधानमंत्री इमरान खान ने सेना व लोगों से किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा है।

कल के हवाई हमले द्वारा मोदी और भाजपा सरकार के दो उद्देश्य हल होते हैं।

पहला, पाकिस्तान पर राजनयिक, आर्थिक और सैन्य दबाव में भारतीय अभियान को तेज़ कर कश्मीर में आतंकी हमलों के जवाब में पाकिस्तान में घुसकर सैन्य कार्रवाई को सही ठहराना है।

2014 में अंबानी और भारत के अन्य नए अरबपतियों द्वारा सत्ता में आने के कुछ ही समय बाद मोदी नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने कश्मीर क्षेत्र में भारतीय प्रभुत्व बढ़ाने तथा वहाँ उग्रवाद के लिए सभी साजो-सामान उपलब्ध कराने पर रोक लगाने के लिए पाकिस्तान के साथ "खेल के नियमों" को बदले जाने के प्रति अपनी प्रतिबद्ध दोहराई।

भारतीय प्रशासन के विरुद्ध विरोध की नई लहर ने 2016 के बाद से भारत के एकमात्र मुस्लिम-बहुल राज्य जम्मू-कश्मीर को मोदी, भाजपा और आरएसएस नेतृत्व वाले हिंदू पक्ष को पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए अधिक दृढ़ किया है।

कल के हवाई हमलों का दूसरा तथा महत्वपूर्ण उद्देश्य भारत में आगामी अप्रैल-मई आम चुनाव के दौरान एक सांप्रदायिक व लड़ाकू राजनीतिक माहौल को बढ़ाना भी है।

भाजपा सरकार द्वारा नौकरियों और विकास के तमाम दावे आज तक श्रमिकों और मेहनतकशों के साथ एक धोखा साबित हुए हैं। आज मोदी सरकार चौतरफ़ा सामाजिक विरोध का सामना कर रही है। इसी के चलते पिछले महीने भाजपा सरकार की "निवेश समर्थक नीतियों" के विरोध में करोड़ों श्रमिकों ने दो दिवसीय हड़ताल की। किसानों के द्वारा भी व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

भाजपा ने मोदी को दुश्मनों को सबक सिखाने में सक्षम एक ऐसे सशक्त नेता के रूप में दिखाया है जो अपनी व सरकार की हर आलोचना, हर विरोध की आवाज़ को देशद्रोही विद्रोह बताते हुये पाकिस्तान के साथ युद्ध के इस माहौल का उपयोग अपने हिंदू वोट बैंक जुटाने के लिए करना चाहती है।

पुलवामा हमले के बाद हिंदू आक्रोश के चलते अराजकता का जो माहौल बना, उसके कारण दूसरे राज्यों के कॉलेजों में पढ़ रहे हजारों कश्मीरी छात्रों को डरकर अपने घर छोड़कर वापिस जाना पड़ा।

भाजपा द्वारा पुलवामा हमले पर दिखाई गई प्रतिक्रिया तथा पारदर्शी राजनीति पूरी तरह से विपक्षी दलों की प्रतिक्रियावादी राजनीति से जुड़ी हुई है।

कश्मीर में भाजपा सरकार द्वारा बर्बरता की कभी कभी आलोचना करते हुए वे सभी कहीं न कहीं पाकिस्तान पर अंकुश लगाने और अपनी महत्वाकांक्षाओं को साकार करने के लिए भारतीय पूंजीपति वर्ग के साथ चारों ओर खड़े दिखाई देते हैं।

2016 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी या सीपीएम) सहित समस्त विपक्ष ने भारत की मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान पर कमांडो कार्रवाई “सर्जिकल स्ट्राइक” की प्रशंसा की - ऐसी कार्यवाई जिसको की मोदी ने भारत-पाकिस्तान नीति के एक “रणनीतिक संयम” को पलटने पर गर्व किया है।

विपक्षी पार्टियों की ओर से कल सबसे पहले कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार के इस कदम के प्रशंसा की। अपने ट्वीट में उन्होने भारतीय वायु सेना द्वारा हवाई हमलों की प्रशंसा करते हुए कहा, “मैं भारतीय वायुसेना के पायलटों को सलाम करता हूं।”

सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने भी सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भाग लेने के लिए जाने से पहले "एक असरदार हमले" के लिए भारतीय सेना की प्रशंसा की। बैठक समाप्त होने के बाद भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि “सभी दलों ने एक सुर में भारतीय सेना की प्रशंसा की है और सरकार के इस आतंकवाद विरोधी कदम का समर्थन किया है।“

पाकिस्तान सरकार व पाकिस्तान के इलीट वर्ग खुद को भारतीय आक्रामकता से प्रताड़ित दिखाने की फ़िराक में हैं। हालांकि अपने इन हालातों के लिए वे स्वयं भी नई दिल्ली की ही तरह जिम्मेदार हैं। ये हालात 1947 के सांप्रदायिक विभाजन के बाद से मुस्लिम बहुल पाकिस्तान और हिंदू बहुल भारत में स्पष्ट रूप से व्याप्त हैं। आज दोनों ही देश परमाणु युद्ध जैसी स्थिति से गुज़र रहे हैं। आज तक पाकिस्तान द्वारा पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में न तो वहाँ के निवासियों के लिए कोई काम किए गए हैं और न ही उन्हें किसी तरह से सुरक्षा देने के प्रयास किए गए हैं; परंतु इस्लामाबाद हमेशा से खुद को कश्मीरीयों का हमदर्द बताता है। पाकिस्तान ने हमेशा अपने राजनीतिक प्रभाव और सैन्य बल का उपयोग कर इस्लामी आतंकी समूहों को खुलकर बढ़ावा दिया है।

भारत-पाकिस्तान मतभेद की मुख्य जड़ें 1947 के विभाजन में निहित हैं जिन्हे वाशिंगटन ने अपनी हिंसक कार्रवाइयों द्वारा बढ़ाया है। जहां एक ओर अमेरिका ने चीन के साथ अपने सैन्य-रणनीतिक गठबंधन का इस्तेमाल करते हुए भारत को अग्रिम पंक्ति के देश के रूप में इस्तेमाल करने के लिए निर्धारित, उत्तराधिकारी प्रशासन, डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सभी ने भारत पर योजनाबद्ध फ़ायदों की बौछार की, वहीं दूसरी ओर इस्लामाबाद की चेतावनियों की निंदा करते हुए कहा कि इन हरकतों द्वारा क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ने की बात काही है।

भारत-अमेरिकी सम्बन्धों की इसी "वैश्विक रणनीतिक साझेदारी" को और मज़बूत के लिए अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने मोदी सरकार को पाकिस्तान पर हमला करने के लिए हरी झंडी दिखाई। पुलवामा हमले के 24 घंटे से भी कम समय के भीतर अपने भारतीय समकक्ष, अजीत डोवाल के साथ परामर्श के बाद, बोल्टन ने घोषणा की कि वाशिंगटन "सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के आत्मरक्षा के अधिकार" का समर्थन करता है। बोल्टन ने ठीक उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल किया जो अमेरिका दशकों से इज़राइल द्वारा फिलिस्तीनियों पर हमले का समर्थन करते वक़्त बोलता रहा है।

भारत-अमेरिकी गठजोड़ का ये डर, जिसमें अमेरिका द्वारा तेल भरने तथा रसद के लिए भारतीय सैन्य ठिकानों का उपयोग करने का एक अधिकार भी शामिल है, चीन और पाकिस्तान को भी रणनीतिक संबंधों को सुधारने के लिए उकसा रहा है। जिसके फलस्वरूप भारत-पाकिस्तान तथा अमेरिका-चीन के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। भारत पाकिस्तान युद्ध विश्व महाशक्तियों के बीच जोखिम को जन्म देकर वैश्विक टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है।

भारत-पाकिस्तान का वर्तमान युद्ध संकट दक्षिण एशिया और दुनिया भर में युद्ध और साम्राज्यवाद के खिलाफ श्रमिक वर्ग के नेतृत्व में एक आंदोलन की कवायद को रेखांकित करता है। रक्तपात और पूंजीवाद की नीतियों का अनुसरण करने वाले मोदी और इमरान खान के विरोध में भारतीय तथा पाकिस्तानी श्रमिकों को अपने संघर्षों को एकजुट कर पूंजीवादी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़नी होगी। उन्हें एक साथ होकर उपमहाद्वीप की सांप्रदायिक शासन प्रणाली को उखाड़कर दक्षिण एशिया में एक संयुक्त समाजवादी शासन की स्थापना करनी होगी।