यह हिंदी अनुवाद अंग्रेजी के मूल 1 month of the Trump administration: The oligarchy vs. the working class ” जो 20 फ़रवरी 2025 को प्रकाशित हुआ थाI
डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति का कार्यभार ग्रहण किए हुए पूरे एक महीने हो गए हैं। पिछले चार हफ़्तों की परिघटनाओं ने चुनाव के दूसरे दिन वर्ल्ड सोशलिस्ट वेब साइट के विश्लेषण को ही साबित किया है कि सत्ता में 'ट्रंप की वापसी, अमेरिका में मौजूद वास्तविक सामाजिक संबंधों के साथ कदमताल करने के लिए अमेरिकी राजनीतिक अधिरचना में जबरिया फेरबदल' को दर्शाती है।
ट्रंप प्रशासन के एक महीने के कार्यकाल की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैंः
1. राष्ट्रपति की शक्तियों का असीमित प्रयोग और आप्रवासी मज़दूरों पर हमला
व्हाइट हाउस में शुरुआत के पहले ही दिन ट्रंप ने सामूहिक निष्कासन और पुलिस राज्य वाले उपायों की रूपरेखा बनाने के लिए एक के बाद एक कई शासकीय आदेशों पर हस्ताक्षर किए। दक्षिणी सीमा पर एक खाम-ख़्याली “घुसपैठ“ का जबाव देने के बहाने, प्रशासन ने ऐसी असीमित शक्तियों को अपने हाथ में ले लिया जिसका इस्तेमाल कारपोरेट और वित्तीय कुलीनतंत्र के ख़िलाफ़ सभी प्रतिरोधों पर किया जाएगा।
शुरुआती शासकीय आदेशों में, 14वें संशोधन में गारंटी की गई जन्मसिद्ध नागरिकता को ख़त्म करना, अमेरिका में सभी आप्रवासियों के बोलने की आज़ादी को समाप्त करना, घरेलू मामलों में सेना का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना और अभूतपूर्व स्तर पर सामूहिक निष्कासन के लिए ज़मीनी तैयारियां करना शामिल है। ये आदेश लाखों लोगों से उनके अधिकार छीन लेने की रूपरेखा बनाते हैं और राष्ट्रपति को मनमर्ज़ी से क़ानूनी और संवैधानिक बाध्यताओं को लांघ जाने की आज़ादी देते हैं।
2. अमेरिकी सैन्यवाद का वैश्विक प्रसार
पिछले एक महीने में, ट्रंप ने बहुत हद तक अमेरिकी सैन्यवाद को उकसाया है, ग़ज़ा में चल रहे जनसंहार को और घनीभूत किया है और पश्चिम एशिया में सीमा पर युद्धों के लिए ज़मीन तैयार कर दी है। उन्होंने ग़ज़ा में नस्लीय सफ़ाये की खुलेआम वक़ालत की है और एलान किया है कि इस इलाक़े को 'खाली करना होगा', यह एक ऐसी नीति है जिसे इसराइल मानता आया है और इसे लागू करना भी शुरू कर दिया है।
दूसरी तरफ़, ट्रंप महत्वपूर्ण संसाधनों और व्यापारिक मार्गों को अपने लिए सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी साम्राज्यवाद की वैश्विक रणनीति को नया आकार दे रहे हैं। उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने के प्रस्ताव को फिर से आगे बढ़ाया है और पनामा नहर को अपने नियंत्रण में लेने की ताल ठोंक दी है, जोकि वैश्विक व्यापार और सैन्य रसद के लिए अहम है। पूर्व पश्चिमी गोलार्द्ध पर अमेरिकी दबदबे को कायम करने के लिए वॉशिंगटन, कनाडा पर आर्थिक और सैन्य दबाव को बढ़ा रहा है। ये सारी तैयारियां चीन से सीधे टकराव मोल लेने के लिए की जा रही हैं क्योंकि प्रशासन आर्थिक युद्ध को तेज़ कर रहा है, व्यापारिक युद्ध की तरकीबों का विस्तार कर रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन को हथियाने की कोशिश कर रहा है, ख़ासकर रेयर अर्थ मैटीरियल और सेमीकंडक्टर के मामले में।
3. मज़दूर वर्ग पर हमला और सामाजिक कार्यक्रमों का ख़ात्मा
एक तरफ़ ट्रंप प्रशासन विदेशों में युद्ध को भड़का रहा है, दूसरी तरफ़ वह घरेलू स्तर पर सामाजिक प्रतिक्रांति को आगे बढ़ा रहा है। एलन मस्क और 'डिपार्टमेंट ऑफ़ गवर्नमेंट एफ़िशिएंसी' (डीओजीई) के मार्फ़त, ट्रंप प्रशासन, वित्तीय कुलीन तंत्र के हित में राज्य के पुनर्गठन को लागू कर रहा है। लक्ष्य है सामाजिक कार्यक्रमों का पूरी तरह विनाश, कारपोरेट मुनाफ़ा बनाने पर लगी सभी बाधाओं को ख़त्म करना और विरोध को दबाने के लिए निगरानी राज को और मजबूत करना।
इस प्रक्रिया में संघीय कर्मचारियों की सामूहिक छंटनी करने और ज़रूरी सार्वजनिक सेवाएं मुहैया कराने वाली एजेंसियों को निशाना बनाते हुए पहला बड़ा क़दम उठाया गया। दसियों हज़ार लोगों को पहले ही नौकरी से बाहर निकाल दिया गया और पूरी एजेंसी पर रातों रात ताला जड़ दिया गया। एनवायरोनमेंट प्रोटेक्शन एजेंसी (ईपीए), फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) और डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज (एचएचएस) उन एजेंसियों में पहले नंबर हैं जिन्हें भारी कटौती का सामना करना पड़ा।
डीओजीई के माध्यम से मस्क संघीय खर्च में दो ट्रिलियन डॉलर की कटौती की योजना की अगुवाई कर रहे हैं, जिसके तहत ऐसे प्रोग्रामों को बंद किया जा रहा है जिनसे मज़दूर वर्ग लाभान्वित होता था और पहले से भी अधिक संपत्ति अति अमीरों को ट्रांसफ़र की जा रही है। इस प्रक्रिया के सबसे मुख्य तत्व के रूप में एआई संचालित निगरानी सिस्टम को स्थापित किया जा रहा है। मस्क आज के समय की ब्लैकलिस्ट बनाने के लिए आईआरएस, सोशल सिक्युरिटी एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य संघीय एजेंसियों के डेटा को एक जगह इकट्ठा कर रहे हैं। इस सिस्टम का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए, विरोध का अपराधीकरण करने और विरोध करने वाले मज़दूरों के ख़िलाफ़ आर्थिक दंड देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
ऐसी सरकार जो कुलीन तंत्र के लिए, कुलीन तंत्र के द्वारा और कुलीन तंत्र की है
और खुले तौर पर ट्रंप एलान कर रहे हैं कि वह एक तानाशाह के रूप में काम कर रहे हैं। मंगलवार को व्हाइट हाउस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट ने ट्रंप की एक तस्वीर पोस्ट की थी जिसमें वह एक ताज़ पहने हुए हैं, और जिस पर लिखा था- 'बादशाह ज़िंदाबाद!' यह उसके एक दिन बाद ही आया जब उन्होंने दावा किया कि 'वह ऐसे व्यक्ति हैं जो देश की रक्षा करता है और किसी क़ानून का उल्लंघन नहीं करता।'
ट्रंप प्रशासन महज भ्रष्ट लोगों की महत्वाकांक्षाओं को ही नहीं दर्शाता है। यह अमेरिकी कारपोरेट और वित्तीय कुलीन तंत्र की राजनीतिक अभिव्यक्ति भी है, जिसने अभूतपूर्व रूप से संपत्ति इकट्ठा कर ली है।
दूसरी तरफ़ ट्रंप के व्हाइट हाउस की नीतियां सिर्फ़ ताक़त का ही मुजाहिरा नहीं करतीं बल्कि संकट और हताशा को भी दिखाती हैं। कुलीनतंत्र का सामना, इसके वैश्विक आर्थिक दबदबे में लंबे समय से चली आ रही गिरावट, वॉल स्ट्रीट के लिए एक के बाद एक बेल आउट से इकट्ठा हुए कर्ज के विशाल पहाड़, इसके खुद के सनक भरे सैन्यवाद के विनाशकारी परिणामों और अमेरिका के अंदर और उसके बाहर बढ़ते विरोध से है।
इस प्रक्रिया में डेमोक्रेटिक पार्टी कहीं भी विरोध में नहीं है, बल्कि इसके मुख्य वास्तुकारों में से एक है। यह सामाजिक प्रतिरोध की पार्टी नहीं है बल्कि यह पूंजीवादी राज्य का एक स्तंभ है और लोकांत्रिक अधिकारों और सामाजिक कार्यक्रमों के विनाश में पूर्ण सहयोगी है।
हालांकि डेमोक्रेट खुद को ट्रंप के आलोचक के रूप में पेश करते हैं, लेकिन उनका विरोध पूरी तरह सत्ताधारी वर्ग की रणनीति के अनुसार है। उनकी सबसे बड़ी चिंता, ट्रंप की तानाशाही वाली महत्वकांक्षा नहीं है बल्कि उनकी वो नीतियां हैं जो यूक्रेन में अमेरिका की अगुवाई वाले जंग को कमज़ोर कर रही हैं और यूरोप में वॉशिंगटन के दबदबे को कम कर रही हैं। यही कारण है कि, राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप के एक महीने के कार्यकाल में, उनका सबसे गला फाड़ विरोध सामाजिक सुरक्षा को रद्दी की टोकरी में फेंकने या आप्रवासियों के ख़िलाफ़ सैन्य बल के इस्तेमाल के ख़िलाफ़ नहीं है बल्कि रूस की कथित 'मिज़ाज-पुर्सी' के ख़िलाफ़ है।
चूंकि ट्रंप अमेरिकी नीतियों में एक बड़ा बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं, वह खुद एक व्यापक प्रक्रिया से उदय हुए हैं, जिसे डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ने नज़रअंदाज़ किया। ग़रीबों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रमों के विनाश की शुरुआत क्लिंटन के ज़माने में शुरू हुई और ओबामा और बाइडन के समय में जारी रही, जिन्होंने इतिहास में अमीरों को सबसे अधिक अमीर बनने की घटना को नज़रअंदाज़ किया। बाइडन प्रशासन की केंद्रीय प्राथमिकता वैश्विक साम्राज्यवादी जंग को भड़काने की थी, जैसे कि यूक्रेन में रूस के ख़िलाफ़ अमेरिकी-नेटो जंग और ग़ज़ा में जनसंहार।
अब, ट्रंप की वापसी के साथ, उनके प्रशासन के ख़िलाफ़ व्यापक विरोध संगठित करने की डेमोक्रेट की कोई मंशा नहीं है। उनको ट्रंप का डर नहीं है बल्कि मज़दूर वर्ग से वे डरे हुए हैं।
मज़दूर वर्ग के साथ बढ़ता टकराव और आगे का रास्ता
ट्रंप प्रशासन का राज्य का हिंसक पुनर्गठन कोई शून्य में घटित नहीं हो रहा है। यह अमेरिका के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते वर्ग संघर्ष के जवाब में हो रहा है क्योंकि सत्ताधारी वर्ग पहले ही कार्रवाई करना चाहता है और अपनी नीतियों के ख़िलाफ़ व्यापक विरोध को कुचल देना चाहता है।
लेकिन राजनीति का पुनर्गठन केवल एक तरफ ही नहीं आकार ले रहा है। पिछला दो साल मज़दूर वर्ग के संघर्ष में अच्छी ख़ासी बढ़ोत्तरी का साल रहा है, जिसमें एयरोस्पेस वर्कर, लॉजिस्टिक वर्कर, शिक्षक, ऑटो कंपनियों के मज़दूर, स्वास्थ्यकर्मी और सेवा से जुड़े वर्कर शामिल हैं। ट्रंप-मस्क के विध्वंस अभियान के ख़िलाफ़ संघीय कर्मचारियों और सरकारी वैज्ञानिकों में विरोध उभर रहा है। डाक सेवाओं के निजीकरण की प्रशासन की योजनाओं को लेकर डाक कर्मियों के बीच बड़े पैमाने पर असंतोष उभर रहा है। इस योजना से बड़े पैमाने पर छंटनी हो सकती है और एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्था नष्ट हो सकती है।
ट्रंप प्रशासन की नीतियां ऐसे समय लागू हो रही हैं जब सामाजिक संकट बढ़ रहा है और करोड़ों लोग ग़रीबी, बेघर होने और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की कमी का सामना कर रहे हैं। पिछले हफ़्ते डेट्रॉयट में दो बेघर बच्चे अपनी कार में ठंड से ठिठुर कर मर गए जबकि उन्होंने बार बार मदद की गुहार लगाई थी- यह ट्रंप के एजेंडे के परिणामों की एक भयानक नज़ीर है। दूसरी तरफ़, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेकार बनाया जा रहा है, जबकि कोविड-19 महामारी का दौर अभी जारी ही है और एच5एन1 “बर्ड फ़्लू“ जैसी नई बीमारियों का ख़तरा बिना रोकटोक उभर रहा है। सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को ख़त्म करना और सामाजिक कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर कटौती, करोड़ों लोगों के लिए विनाशकारी नतीजे लाने वाला होगा, जिनमें वे वर्कर भी शामिल हैं जिन्होंने ट्रंप को वोट किया था।
जिस पैमाने पर और रफ़्तार से ये हमले किया जा रहे हैं, ये आम हड़ताल के आह्वान समेत विरोध के सघन आंदोलनों को भड़काएंगे। लेकिन इस विकसित हो रहे आंदोलन की मुख्य बाधा है कारपोरेट परस्त ट्रेड यूनियन नौकरशाही, जिसने मज़दूरों के संघर्षों को व्यवस्थित रूप से दबाने का काम किया है। बाइडन प्रशासन के दौरान यूनियन तंत्र ने कारपोरेट हितों को लागू करने में मुख्य भूमिका निभाई, जैसे रेल रोड वर्करों पर सरकार समर्थित कांट्रैक्ट को थोपने में, जिसे बहुमत से ख़ारिज़ कर दिया गया था।
ट्रंप की वापसी के साथ ही, यूनियन का तंत्र खुद को नए राज के अनुकूल बनाने की कोशिश कर रहा है, जैसा इसने ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान किया था। टीमस्टर्स अध्यक्ष सीन ओ'ब्रायन ने खुद को व्हाइट हाउस के एक सलाहकार रूप में स्थापित किया है, जबकि यूएडब्ल्यू अध्यक्ष शान फ़ैन ने राष्ट्रवादी आर्थिक नीति पर ट्रंप के साथ 'मिलजुल कर' काम करने की इच्छा जताई है। लाखों सरकारी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला अमेरिकन फ़ेडरेशन ऑफ़ गवर्नमेंट एम्प्लाईज़ (एएफ़जीई) सामूहिक छंटनी के विरोध में एक तिनका भी नहीं हिला रहा है। यह अपने वर्करों को बता रहा है कि कोर्ट पर भरोसा रखो या फिर नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड (एनएलआरबी) से खोखली अपीलें कर रहा है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर या उसके साथ काम करने वाले छद्म वामपंथी संगठनों पर भी ट्रंप के उभार की सीधी ज़िम्मेदारी आती है। पिछले एक दशक में, इन ताक़तों ने नस्लीय और जेंडर के आधार पर मज़दूर वर्ग में विभाजन पैदा करने की कोशिशें की हैं।
सोशलिस्ट इक्वालिटी पार्टी ट्रंप प्रशासन के ख़िलाफ़ मज़दूर वर्ग को संगठित करने के संघर्ष की अगुवाई कर रही है और तानाशाही, युद्ध और पूंजीवादी शोषण के ख़िलाफ़ एक संघर्ष में मज़दूरों को एकजुट कर रही है। इसकी कोशिशों के केंद्र में है- रैंक एंड फ़ाइल कमेटियों का इंटरनेशनल वर्कर्स अलायंस (आईडब्ल्यूए-आरएफ़सी), जिसे वर्करों को पूरे उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने संघर्षों में सांगठनिक तालमेल बिठाने के मकसद से चौथे इंटरनेशनल की इंटरनेशनल कमेटी (आईसीएफ़आई) द्वारा बनाया गया है।
आईडब्ल्यूए-आरएफ़सी कार्यस्थलों, स्कूलों और बस्तियों में रैंक एंड फ़ाइल कमेटियां बनाने के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष कर रहा है, जोकि संघर्ष के स्वतंत्र संगठन हैं जो प्रतिरोध के केंद्र के रूप में काम करेंगे। ये कमेटियां वर्करों को अपने सामाजिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा में मज़दूर वर्ग के सभी तबकों को लामबंद करेंगी और सामूहिक छंटनी और सामाजिक कार्यक्रमों में कटौती के ख़िलाफ़ संघर्ष से लेकर आप्रवासियों की रक्षा और युद्ध के ख़िलाफ़ संघर्ष की लड़ाईयों को आपस में जोड़ेंगी।
आईडब्ल्यूए-आरएफ़सी, तालमेल और सहयोग के एक शक्तिशाली नेटवर्क के माध्यम से, वर्करों को संयुक्त राज्य अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़तालों, विरोध प्रदर्शनों और सामूहिक कार्रवाइयों के समन्वय के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान करेगा।
तानाशाही के ख़िलाफ़ लड़ाई, पूंजीवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई से अलग नहीं है। सोशलिस्ट इक्वालिटी पार्टी मज़दूर वर्ग के हितों में समाज को पुनर्गठित करने के लिए एक समाजवादी कार्यक्रम को आगे बढ़ाती है। वित्तीय कुलीनतंत्र की संपत्ति को ज़ब्त किया जाना चाहिए और इसका उपयोग सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और अच्छे वेतन वाली नौकरियों को सुरक्षित करने के वित्तपोषण के लिए किया जाना चाहिए। साम्राज्यवादी युद्ध मशीन को नष्ट किया जाना चाहिए, अमेरिका के नेतृत्व वाले युद्धों को समाप्त किया जाना चाहिए और सैन्य खर्च को समाज के पुनर्निर्माण की ओर लगाया जाना चाहिए। राजनीतिक और आर्थिक सत्ता मज़दूर वर्ग के हाथों में देने के लिए एक मज़दूर सरकार की स्थापना की जानी चाहिए, न कि पूंजीवादी कुलीनतंत्र के हाथों में इसे जाने देना चाहिए।
हम उन सभी कार्यकर्ताओं और युवाओं से अपील करते हैं जो इस लड़ाई में शामिल होना चाहते हैं और सोशलिस्ट इक्वालिटी पार्टी का निर्माण करना चाहते हैं। मज़दूर वर्ग ही एकमात्र सामाजिक शक्ति है जो तानाशाही की ओर जाने वाली मुहिम को रोकने में सक्षम है, लेकिन उसे एक क्रांतिकारी नेतृत्व और कार्यक्रम से लैस होना चाहिए। एसईपी इस नेतृत्व के निर्माण, मज़दूर वर्ग को आगे के विशाल संघर्षों के लिए तैयार करने और समाजवादी भविष्य के लिए लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
